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उत्कटासन योग विधि करिये योग रहिये निरोग.. Utkatasana Yoga

यहां पर आपको उत्कटासन के सरल तरीके के बारे में बताया जा रहा है जिसका अनुसरण करके आप इस आसन का अभ्यास अच्छी तरह से कर सकते हैं।

पैर को थोड़ा दूर रखकर और रीढ़ एवं सिर को सीधा रखते हुए बैठ जाएं।

सांस खींचते हुए पंजों पर बैठकर अच्छी तरह से दोनों एडि़यों को उठाएं।

दोनों कोहनियों को घुटनों पर रखें।
एक हाथ को दूसरे पर रखकर इसको अपनी ठोड़ी पर टिका दें।
सांस छोड़ते हुए नितंबों को एडि़यों पर टिकाएं।

धीरे धीरे सांस लें और धीरे धीरे सांस छोड़े और साथ ही साथ इसी स्थिति में बने रहें।

स्थिति में बने रहने की अवधि आप पर निर्भर करता है। धीरे धीरे आप इस अवधि को बढ़ाते रहें।

फिर धीरे-धीरे आरंभिक अवस्था़ में लौट आएं।
यह एक चक्र हुआ। इस तरह से आप तीन से पांच चक्र करें

उत्कटासन योग लाभ I Utkatasana benefits
उत्कटासन पंजों को मजबूत करने में बड़ी भूमिका निभाता है।
यह जांघों को स्वस्थ रखता है।
घुटनों को शक्ति प्रदान करता है।
इस तरह से आपके पैरों को मजबूत बनाता है और चलने फिरने में मदद करता है।

पाचन तंत्र की सक्रियता बढ़ाने में मदद करता है।

गठिया रोग में इसका अभ्यास करने से फायदा मिलता है।

यह रीढ़ की हड्डी के लिए लाभदायक है।

छाती के मांसपेशियों को मजबूत बनाता है।

पीठ के निचले हिस्से को स्वस्थ एवं मज़बूती प्रदान करता है |

शरीर में संतुलन बनाने में सहायक है।

इस आसन का अभ्यास से शरीर में स्फूर्ति बनी रहती है।

इसका नियमित अभ्यास से भूख खूब लगती है।

यह आसन स्त्रियों के लिए एक अलग मकाम रखता है।

कब्ज को कम कर गैस समस्या को रोकता है।

इस आसन के अभ्यास से आप पथरी एवं हर्निया से बच सकते हैं।
इसके नियमित अभ्यास से वीर्य का प्रभाव सही तरीके से होने लगता है और पुरुष इसको बहुत देर तक रोक सकते हैं।

जिनको पाइल्स की समस्या है उनको प्रायः इस आसन का अभ्यास करनी चाहिए।
इसके अभ्यास से वायुदोष को ठीक करने में मदद मिलती है।

उत्कटासन योग सावधानी I Utkatasana precaution
गंभीर गठिया रोग होने से इसको करने से बचें।

चककर आने पर इस अभ्यास को करने से बचें।

टखने में चोट होने पर यह आसन नहीं करना चाहिए।

घुटने का दर्द होने पर इसका अभ्यास न करें।

सिर दर्द और अनिद्रा की स्थिति में कुर्सी आसन का अभ्यास ना करें।
मासिक धर्म के दौरान इस आसन के अभ्यास में विशेष ध्यान रखें।

इसको खाली पेट अभ्यास करनी चाहिए।

ह्रदय रोग वाले इसको किसी विशेषज्ञ के निगरानी में करनी चाहिए।